बदलते रिश्ते (पार्ट 1) Kishanlal Sharma द्वारा सामाजिक कहानियां में हिंदी पीडीएफ

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बदलते रिश्ते (पार्ट 1)

बेटी को पराया धन माना जाता है।इसलिए बेटी के जवान होते ही माँ बाप को उसकी शादी की चिंता सताने लगती है।बेटी के हाथ पीले करने से पहले ही पिता इस दुनिया से चला जाये,तो माँ की चिंता और बढ़ जाती है।गृहणी बनकर जीवन काटने वाली औरत को बेटी के लिए वर की तलाश में घर से बाहर जाना ही पड़ता है।
बेटी की पढ़ाई पूरी होते हीी सालू को उसकी शादी की चिंता सताने लगी।उसने कई जगह बेटी के रिश्ते के लियेे बात चलाई।कई लड़के रश्मि को देखने के लििये भी आयेे। इतना बड़ा बंगला और चल अचल सम्पति की इकलौती वारीस ।लेकिन रश्मि का रिशता कही भी पक्का नही हो सका।जो भी लड़का आया उसे रश्मि पसनंद आ गई।हर कोई उसके खानदान सेे सम्बध जोोडने केे लिये लालायित नज़र आया। फिर भी उसका रिश्ता कही नही हो पााया क्योकि रश्मि को कोई लड़का पसंद ही नही आया।बेेेटी के मुुुह से बार बार ना सुनकर एक दिन सालू गुससेे में बोली,"न जाने तू कैसे लड़के को अपना जीवन साथी बनाना चाहती है?"
माँ के नाराज होने पर भी रश्मि नही बोली,तो सालू ने अपना स्वर बदलते हुए प्यार से पूछा,"कहीं तूने किसी को पसंद तो नही कर रखा।अगर प्यार का चक्कर हो तो मुझे बता दे।"
माँ के प्यार से पूछने पर रश्मि बोली,"मैं रमेश को चाहती हूँ।उससे प्यार करती हूँ। उसे ही अपना जीवन साथी बनाना चाहती हूँ।"
"तूने मुझे पहले क्यो नही बताया।अगर पहले बता देती तो बार बार लड़की दिखाने का नाटक क्यो करती?'लड़को को क्यो अपने घर बुलाती?"सालू को बेटी पर गुस्सा तो बहुत आया।लेकिन खुशी भी हुई कि बेटी ने दिल की बात उसे बता दी।"
बेटी के दिल की बात जानकर पहले सालू ने सोचा।रमेश को घर बुला ले।लेकिन फिर उसे ऐसा करना उचित नही लगा।लड़की वाला गरजमन्दः होता है।प्यासा ही कुए के पास जाता है।रिश्ते के लिए लड़की वाले ही लड़के के घर जाते है।इसलिए वह रमेश के घर जा पहुंची।
सालू ज्यो ही रमेश के कमरे में पहुंची।उसकी नज़र मेज पर रखे फोटो पर पड़ी।पुरुष के साथ महिला।सकल जानी पहचानी लगी।फिर भी उसने रमेश से पूछा था,"यह फोटो किसका है?"
"मेरे पापा महेश और मम्मी राधिका।"
रमेश के पिता के बारे में जानकर सालू को झटका सा लगा।ठंड के मौसम में भी उसके चेहरे पर पसीने की बूंदे छलछला आयी।दिल मे छिपे राज को दबाने के प्रयास में वह असामान्य हो गई।वापस आकर अपनी कार में बैठते हुए ड्राइवर से बोली,"चलो।"
कार आगे चल रही थी लेकिन उसका मन पीछे अतीत में भटक रहा था।
महेश से सालू की मुलाकात कॉलेज में नाटक के रिहर्सल के समय हुई थी।उस नाटक में सालू ने शकुंतला और महेश ने दुष्यंत का रोल अदा किया था।उसी समय वे एक दूसरे के प्रति आकर्षित हुए थे।उनके दिल मे प्यार का अंकुर फूटा था।और वे एक दूसरे को चाहने लगे।
उनकी क्लास अलग अलग थी।लेकिन उनका कॉलेज के बाद का काफी समय साथ गुज़रने लगा।महेश एकान्तप्रिय था।शोरगुल से दूर।वह सालू को दौलत बाग ले जाता।किसी पेड़ के नीचे,किसी एकांत कोने में सालू की गोद मे सिर रखकर लेट जाता और सालू के सौंदर्य को निहारा करता।
सालू का रंग सलोना था।उसकी देह कमसिन और छरहरी थी।उसकी चाल में अल्हड़पन और आवाज में जादू था।उसकी हंसी पर महेश मोहित था।सालू खिलखिलाकर हँसती तो ऐसा लगता बाग में फूल झड़ रहे हों।दिन गुज़रने के साथ वे इतने आगे निकल आये की एक दिन सालू को कहना पड़ा,"महेश इस तरह कब तक चलेगा?"